26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस आते ही टीवी, मोबाइल और OTT प्लेटफॉर्म पर देशभक्ति फिल्मों की कतार लग जाती है। ज्यादातर लोग हर साल वही आज़ादी और युद्ध पर बनी पुरानी फिल्में देख लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गणतंत्र दिवस सिर्फ आज़ादी का जश्न नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान का उत्सव भी है? अगर इस बार आप भी कुछ अलग और अर्थपूर्ण देखना चाहते हैं, तो ऐसी फिल्मों को चुनिए जो गणतंत्र का असली मतलब, नागरिक कर्तव्य और लोकतांत्रिक मूल्यों को समझाती हों।
गणतंत्र दिवस और आज़ादी दिवस में क्या है फर्क
अक्सर लोग 15 अगस्त और 26 जनवरी को एक ही नजरिए से देखते हैं, जबकि दोनों दिनों का महत्व अलग है। 15 अगस्त देश को आज़ादी मिलने का दिन है। 26 जनवरी भारत के संविधान के लागू होने का दिन है। यानी गणतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है कि भारत सिर्फ आज़ाद ही नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक देश भी है, जहां कानून, अधिकार और कर्तव्य सबसे ऊपर हैं।
हर बार वही ‘आजादी वाली’ फिल्में क्यों नहीं
देशभक्ति जरूरी है, लेकिन सिर्फ युद्ध और दुश्मन से लड़ाई दिखाने वाली फिल्में देखना ही गणतंत्र दिवस का मकसद नहीं है। गणतंत्र दिवस पर ऐसी कहानियां भी देखनी चाहिए जो यह बताएं कि एक आम नागरिक की जिम्मेदारी क्या है। देश की रक्षा सिर्फ सीमा पर नहीं, बल्कि विचारों से भी होती है।
लोकतंत्र कैसे चलता है और कैसे बचाया जाता है।
गणतंत्र का मतलब समझाने वाली ज़रूरी फिल्में
उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक
यह फिल्म देश की सुरक्षा से जुड़े फैसलों, नेतृत्व और जवाबदेही को दर्शाती है। यह बताती है कि लोकतंत्र में फैसले सिर्फ भावनाओं से नहीं, रणनीति से लिए जाते हैं।
राज़ी
एक आम लड़की देश के लिए अपनी निजी जिंदगी कुर्बान कर देती है। यह फिल्म दिखाती है कि देशभक्ति सिर्फ बंदूक उठाना नहीं, बल्कि चुपचाप देश के लिए जीना भी है।
शेरशाह
कैप्टन विक्रम बत्रा की कहानी सिर्फ युद्ध की नहीं, बल्कि कर्तव्य और संविधान के प्रति निष्ठा की कहानी है। यह फिल्म हर नागरिक को अपने फर्ज़ याद दिलाती है।
केसरी
यह फिल्म बहादुरी के साथ-साथ यह भी सिखाती है कि सम्मान, अनुशासन और आत्मबल ही गणतंत्र की असली ताकत हैं।
बॉर्डर (या बॉर्डर 2)
सीमा पर तैनात जवानों की कहानी बताती है कि लोकतंत्र की नींव त्याग और जिम्मेदारी पर टिकी होती है।
गणतंत्र दिवस पर फिल्में देखने का सही नजरिया
गणतंत्र दिवस सिर्फ जोश और जज्बे का दिन नहीं है, बल्कि सोचने और समझने का दिन भी है।
इसलिए इस बार फिल्म चुनते वक्त खुद से पूछिए “क्या यह फिल्म मुझे सिर्फ भावुक कर रही है, या एक बेहतर नागरिक भी बना रही है?”
हर साल वही आज़ादी वाली फिल्में देखना बुरा नहीं है, लेकिन गणतंत्र दिवस पर ऐसी फिल्में देखना ज़रूरी है। जो हमें हमारे अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की भी याद दिलाएं। इस 26 जनवरी को मनोरंजन के साथ-साथ लोकतंत्र को समझिए, संविधान को महसूस कीजिए और एक जिम्मेदार नागरिक बनने की सोच अपनाइए।





