तमिल सुपरस्टार थलापति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म जन नायकन एक बार फिर सुर्खियों में आई है। इस बार वजह है फिल्म की रिलीज़ से जुड़ा सेंसर सर्टिफिकेट विवाद, जिस पर मद्रास हाई कोर्ट में अहम सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान फिल्म के निर्माताओं ने बॉलीवुड फिल्म ‘धुरंधर 2’ का उदाहरण देकर अदालत में अपनी बात रखी।
कोर्ट ने क्यों उठाया सवाल?
मामले की सुनवाई के दौरान मद्रास हाई कोर्ट ने सीधा सवाल करके, जन नायकन को अभी तक CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) से सर्टिफिकेट नहीं मिला, तो फिर रिलीज़ डेट पहले ही क्यों घोषित कर दी गई? कोर्ट का मानना था कि सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पूरी होने से पहले रिलीज़ का ऐलान करना नियमों के खिलाफ हो सकता है।
‘धुरंधर 2’ का दिया उदाहरण
निर्माता पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील सतीश पराशरन ने अदालत को बताया है कि यह कोई असामान्य बात नहीं है। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में कई बार रिलीज़ डेट सर्टिफिकेट से पहले घोषित कर दी जाती है। इसी दलील के समर्थन में उन्होंने रणवीर सिंह स्टारर फिल्म ‘धुरंधर 2’ का हवाला दिया, जिसकी रिलीज़ डेट भी पहले घोषित की जा चुकी है, जबकि सर्टिफिकेशन प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई थी। वकील ने दलील दी कि अगर ऐसा प्रयास अन्य फिल्मों के लिए स्वीकार्य है, तो जन नायकन के फिल्म के मामले में इसे अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
कोर्ट का रुख क्या रहा?
हालाँकि अदालत इस दलील से पूरी तरह सहमत नजर नहीं आई। कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ यह तर्क कि फिल्म में भारी निवेश हुआ है या रिलीज़ डेट तय हो चुकी है, नियमों में छूट का आधार नहीं बन सकता। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि सर्टिफिकेशन से जुड़ी प्रक्रिया को हल्के में नहीं लिया जा सकता है और हर फिल्म को तय नियमों के तहत ही आगे बढ़ना चाहिए।
जन नायकन की रिलीज़ में क्यों हो रही है देरी?
जन नायकन को जनवरी 2026 में रिलीज़ किया जाना था, लेकिन फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड की ओर से कुछ समस्याए सामने आईं।
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अब तक क्या हुआ?
इस फिल्म को दिसंबर 2025 में CBFC को सौंप दिया गया था। बोर्ड ने कुछ कट सुझाए मेकर्स ने बदलाव कर फिल्म दोबारा जमा की। इसके बाद फिल्म को रीवाइजिंग कमेटी के पास भेजा गया, जिससे ज्यादा देरी हुई। इसी देरी के कारण निर्माता हाई कोर्ट पहुंचे। फिलहाल, मद्रास हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, और सब की नजरें अब अदालत के आखिरी आदेश पर टिकी हैं।
इंडस्ट्री के लिए क्यों अहम है यह मामला?
यह मामला सिर्फ जन नायकन तक सीमित नहीं रहा है। अगर कोर्ट इस पर कोई सख्त दिशा-निर्देश देता है, तो इसका असर पूरे फिल्म उद्योग पर पड़ जाएगा । खासकर उन फिल्मों पर जो पहले से अपनी रिलीज़ डेट और प्रमोशन प्लान के कार्य में जुटी रहती हैं। जन नायकन बनाम CBFC का यह मामला अब एक उदाहरणात्मक केस बनता हुआ देखा जा रहा है। जहाँ एक तरफ सभी निर्माता इसे इंडस्ट्री की सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं, वहीं कोर्ट नियमों की सख्ती पर ज़ोर दे रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि क्या फिल्म को जल्द हरी झंडी मिलेगी या रिलीज़ के लिए अभी और इंतज़ार करना पड़ सकता हैं।






