‘बंटवारा 1947’ की एक्ट्रेस प्रीति जिंटा पहुंचीं बॉम्बे हाई कोर्ट, AI के गलत इस्तेमाल को लेकर उठाया बड़ा कदम

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सनी देओल की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बंटवारा 1947’ का टीजर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा तेज हो गई है। फिल्म के दमदार विजुअल्स और भावनात्मक कहानी की झलक ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसी बीच फिल्म की प्रमुख अभिनेत्री प्रीति जिंटा एक अलग वजह से सुर्खियों में आ गई हैं। अभिनेत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कथित दुरुपयोग को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला सिर्फ एक अभिनेत्री से जुड़ा विवाद नहीं माना जा रहा, बल्कि डिजिटल दुनिया में तेजी से बढ़ रहे AI कंटेंट और सेलेब्रिटी अधिकारों से जुड़ी एक बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है।

क्या है पूरा मामला

रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रीति जिंटा ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उनकी अनुमति के बिना AI तकनीक का इस्तेमाल करके उनकी नकली तस्वीरें, डिजिटल कंटेंट और अन्य सामग्री तैयार की गई तथा इंटरनेट पर प्रसारित की गई। अभिनेत्री का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से उनकी छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।
प्रीति जिंटा ने दावा किया है कि उनके नाम, चेहरे और पहचान का उपयोग बिना सहमति के किया गया, जो उनके व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) का उल्लंघन है। उनका मानना है कि ऐसे कंटेंट को देखकर आम लोग भ्रमित हो सकते हैं और उसे वास्तविक समझ सकते हैं।

किन कंपनियों पर लगाए गए आरोप

याचिका में अभिनेत्री ने कुछ बड़ी टेक और डिजिटल कंपनियों का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने आरोप लगाया है कि विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर AI की मदद से तैयार की गई सामग्री प्रसारित की गई, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि प्रभावित हुई। हालांकि मामला अभी कानूनी प्रक्रिया में है और अंतिम निर्णय आना बाकी है, लेकिन इसने AI तकनीक के जिम्मेदार उपयोग को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

अदालत में प्रीति जिंटा की बड़ी दलील

प्रीति जिंटा ने अपनी याचिका में कहा कि उनकी पहचान और व्यक्तित्व का व्यावसायिक तथा डिजिटल उपयोग बिना अनुमति के किया गया। अभिनेत्री का मानना है कि यह न केवल उनके अधिकारों का उल्लंघन है बल्कि इससे उनकी वर्षों में बनाई गई विश्वसनीयता और लोकप्रियता को भी नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेट पर मौजूद AI जनरेटेड सामग्री कई बार इतनी वास्तविक दिखाई देती है कि आम दर्शक उसके असली और नकली होने में अंतर नहीं कर पाते।

कॉपीराइट और पर्सनैलिटी राइट्स का मुद्दा

इस मामले में प्रीति जिंटा ने कॉपीराइट कानून और व्यक्तित्व अधिकारों का भी हवाला दिया है। अभिनेत्री का कहना है कि उनकी छवि, नाम और पहचान का इस्तेमाल उनकी मंजूरी के बिना किया गया, जो कानूनी रूप से गलत है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI से जुड़े ऐसे मामलों की संख्या और बढ़ सकती है। यही वजह है कि अदालतों के सामने भी नए तरह के कानूनी प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या कहा

रिपोर्ट्स के अनुसार, बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रीति जिंटा को आगे मुकदमा दायर करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने माना कि मामले की सुनवाई की जा सकती है, भले ही इसमें शामिल कुछ कंपनियों के कार्यालय अलग-अलग शहरों और देशों में मौजूद हों। कोर्ट की यह अनुमति कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण मानी जा रही है। अब आगे की सुनवाई में विभिन्न पक्षों की दलीलें सामने आएंगी।

AI और डीपफेक की बढ़ती चुनौती

पिछले कुछ वर्षों में AI तकनीक ने कई क्षेत्रों में क्रांति लाई है। लेकिन इसके साथ ही डीपफेक वीडियो, नकली तस्वीरों और फर्जी डिजिटल कंटेंट की समस्या भी तेजी से बढ़ी है। कई बार मशहूर हस्तियों की तस्वीरों और आवाजों का उपयोग करके ऐसा कंटेंट बनाया जाता है, जिससे गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं। इसी वजह से दुनिया भर में AI के नियमन और जिम्मेदार उपयोग पर बहस तेज हो गई है।

‘बंटवारा 1947’ को लेकर भी बढ़ी चर्चा

दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन यह कानूनी खबर सामने आई, उसी दिन सनी देओल की फिल्म ‘बंटवारा 1947’ का टीजर भी रिलीज हुआ। फिल्म में सनी देओल, प्रीति जिंटा, शबाना आजमी, अली फजल और करण देओल जैसे कलाकार नजर आने वाले हैं। फिल्म भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसे निर्देशक राजकुमार संतोषी ने बनाया है। इस प्रोजेक्ट को आमिर खान प्रोडक्शंस का समर्थन प्राप्त है।

सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया

प्रीति जिंटा के कोर्ट जाने की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने अभिनेत्री के कदम का समर्थन किया और कहा कि AI के गलत इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि तकनीक के विकास के साथ नए नियम और सुरक्षा उपाय भी लागू किए जाने चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला भविष्य में आने वाले कई AI विवादों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

निष्कर्ष

प्रीति जिंटा द्वारा बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख करना सिर्फ एक व्यक्तिगत कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि डिजिटल युग में पहचान और अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। अभिनेत्री का आरोप है कि AI की मदद से उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल किया गया, जिससे उनकी छवि प्रभावित हुई। अब सबकी नजर अदालत की आगामी सुनवाई पर रहेगी। दूसरी ओर, ‘बंटवारा 1947’ का टीजर भी दर्शकों का ध्यान खींच रहा है। ऐसे में प्रीति जिंटा एक साथ अपनी फिल्म और इस कानूनी मामले दोनों वजहों से सुर्खियों में बनी हुई हैं।

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